Breaking news

[email protected] | +91-9406858420

logo
header-add

जीरन में ‘नानी बाई का मायरा’ कथा, नरसी जी के भक्ति समर्पण ने किया भक्तों को भावविभोर

12-01-2026




जीरन। नगर के दशहरा मैदान में आयोजित पाँच दिवसीय 'नानी बाई का मायरा' कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक पंडित श्री चंद्रदेव जी महाराज ने भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के जीवन संघर्ष और उनकी अनन्य कृष्ण भक्ति के प्रसंगों को विस्तारपूर्वक सुनाया, जिसे सुनकर पाण्डाल में मौजूद हर श्रद्धालु भावविभोर हो गया।

पंडित जी ने बताया कि नरसी जी के माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी भाभी का व्यवहार अत्यंत निर्दयी हो गया था। संसार के इन दुखों और भाभी के कटु वचनों ने नरसी जी के मन में वैराग्य पैदा कर दिया और उनका सांसारिक मोह भंग हो गया। महाराज ने एक चमत्कारिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि नरसी जी जन्म से बोल और सुन नहीं सकते थे, लेकिन एक सिद्ध संत की कृपा से उन्हें वाणी मिली और उनका बहरापन दूर हो गया। बोलने की शक्ति मिलते ही उनके मुख से जो पहला शब्द निकला, वह "गोविंद" था।

शिव की कृपा से ठाकुर जी के दर्शन

कथा में आगे बताया गया कि जब नरसी जी सांसारिक कष्टों से व्यथित होकर शिव की शरण में गए, तो भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें साक्षात ठाकुर जी (श्रीकृष्ण) के दर्शन कराए। यहीं से नरसी जी का जीवन पूरी तरह बदल गया और वे एक गृहस्थ से महान संत बन गए। कथा के दौरान जब पंडित जी ने नरसी मेहता और नानी बाई के मायरे से जुड़े भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पाण्डाल तालियों की गूँज और "जय श्री कृष्णा" के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने झूमकर अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।